Ramcharitmanas in Hindi PDF | संपूर्ण रामचरितमानस डाउनलोड करे

इस लेख के अंत में ramcharitmanas pdf  डाउनलोड करने का लिंक दिया गया है, इसके अतिरिक्त ramcharitmanas के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गयी जिसे आपको पूरा पढ़ना चाहिए।  

आरति श्रीरामायनजी की। कौरति कलित ललित सिय पी की॥ गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बालमीक बिग्यान बिसारद॥

सुक सनकादि सेष अरू सारद। बरनि पवनसुत कीौरति नीकी॥ गावत बेद पुरान अष्टद्स। छओ सास्त्र सब ग्रंथन को रस॥

मुनि जन धन संतन को सरबस। सार अंस संमत सबही की॥ गावत संतत संभु भवानी । अरू घटसंभव मुनि बिग्यानी॥

ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी। कागभुसुंडि गरुड के ही की॥ ‘कलिमल हरनि बिषय रस फीकी। सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की॥

दलन रोग भव मूरि अमी की। तात मात सब बिधि तुलसी की॥

Ramcharitmanas in Hindi PDF

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Sri Ramcharitmanas

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Hindi

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Ramcharitmanas In Hindi Pdf Summary

Ramcharitmanas pdf
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ग्रंथ की रचना ऐसे समय में हुई थी जबकि हिन्दू जनता अपना समस्त शौर्य एवं पराक्रम खो चुकी थी। विदेशियों के चरण भारत में जम चुके थे। वह समय दो विरोधी संस्कृतियों, साधनाओं और सभ्यताओं का संधिकाल था। ऐसे ही काल में युग-प्रवर्तक, उच्च कोटि के भक्त कवि तुलसीदास (Tulsidas) का प्रादुर्भाव हुआ। लोकचेतना के शक्तिशाली तत्वों की उन्हें अद्भुत पहचान थी। राम के लोकोत्तर चरित्र के अजर-अमर गायक रस-सिद्ध किया, वहीं समाज, जाति और राष्ट्र के प्राणों में नव-जागरण की चेतना के स्वर फूँके।


‘रामचरितमानस’ मुझे क्यों सर्वप्रिय है? इसके कई कारण हैं। रामचरितमानस का कथा-शिल्प अत्यन्त सूझ-बूझ से युक्त है। इसमें मार्यादा पुरूषोत्तम भगवान् राम (Lord Rama) के पावन एवं लोकरक्षक चरित्र का विशद् वर्णन हुआ है। सच तो यह है कि मानव जीवन के विविध पहलुओं एवं भावनाओं का जितना सुन्दर वर्णन हमें इस ग्रन्थ में मिलता है, उतना किसी अन्य महाकाव्य में नहीं मिलता।


‘रामचरितमानस’ एक सफल महाकाव्य है। भगवान् राम ‘मानस’ के धीरोदात्त नायक हैं। वे परब्रह्म होते हुए भी इस ग्रंथ में एक गृहस्थ के रूप में आते हैं। वे सर्वत्र आदर्श की रक्षा करते हैं। इस काव्य के चरित्रों के माध्यम से तुलसीदास ने समाज को ऐसे मानवीय मूल्य दिए हैं जो देश और काल की सीमा से परे हैं। मानव हृदय की जिस सुदृढ़ भूमि पर रामचरितमानस का भव्य प्रासाद खड़ा है, वह वास्तव में सनातन एवं सार्वभौमिक है।


श्रीरामचरितमानस की ‘संवाद-शैली’ मुझे अत्यंत प्रिय है। इसका आरंभ संवादों से होता है, मध्य भी और अंत भी। कथा के आधारभूत संवाद हैं- ‘शिव-पार्वती संवाद’, ‘गरूड़-काकभुशुण्डि संवाद’, और ‘याज्ञवल्क्य-भारद्वाज संवाद’। इनके अतिरिक्त ‘लक्ष्मण-परशुराम संवाद’, ‘रावण-अंगद संवाद’ आदि भी प्रभावशाली बन पड़े हैं। तुलसीदास जी ने मार्मिक स्थलों का चुनाव बड़ी कुशलतापूर्वक किया है। ‘राम-वनवास’, ‘भरत-मिलाप’, ‘सीताहरण’, ‘लक्ष्मण-मूर्च्छा’ आदि प्रसंगों को मार्मिक बना दिया गया है।

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