आज की इस पोस्ट में हम आपके लिए एक शॉर्ट हिंदी स्टोरी ''एक दौड़ ऐसी भी'' - Short Story In Hindi With Moral लेकर आये है। यह स्टोरी आपको एक छोटी से Moral शिक्षा प्रदान करेंगी जो आपको जिंदगी के मायने सीखने में सहयोग प्रदान करेगी। 

क दौड़ ऐसी भी - Short Story In Hindi With Moral


कई साल पहले ओलम्पिक खेलो के दौरान दौड़ होने जा रही थी। सौ मीटर की इस दौड़ में गजब की घटना हुई। नो प्रतिभागी शुरुआत की रेखा पर तैयार खड़े थे। उन सभी को कोई न कोई शारीरिक विकलांगता थी। 

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सीटी बजी सभी दौड़ पड़े। बहुत तेज तो नहीं, पर उनमे जितने की होड़ जरूर तेज थी। सभी जितने की उत्सुकता के साथ आगे बढ़े। सभी बस एक छोटे से लड़के को छोड़कर। तभी एक छोटा लड़का ठोकर खाकर लड़खड़ाया फिर गिरा और रो पड़ा। 
उसकी रोने की आवाज सुनकर बाकि प्रतिभागी दौड़ना छोड़ देखने लगे कि क्या हुआ ? फिर एक एक करके सभी प्रतिभागी दौड़ना छोड़ उस लड़के की मदद करने पहुँच गए। सब के सब लोट आये। उसे दोबारा खड़ा किया। उसके आंसू पोंछे, धूल साफ की। 

वह छोटा लड़का के ऐसी बीमारी से ग्रस्त था, जिसमे शरीर के अंगो की बढ़त धीमे होती है और उनमे तालमेल की भी कमी रहती है। इस बीमारी को सामान्यतया डाउन सिंड्रोम कहते है। लड़के की दशा देख एक बच्ची ने उसे अपने गले से लगा लिया और उसे प्यार से चुम लिया यह कहते हुए की इसे अच्छा लगेगा। 
फिर तो सारे बच्चो ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और साथ मिलकर दौड़ लगाई और सब के सब अंतिम रेखा तक एक साथ पहुँच गए। सभी दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देखने लगे यह सोचते हुए कि सब के सब एक साथ बाजी ( प्रतियोगिता ) जीत चुके थे। 

इनमे से किसी एक स्वर्ण पदक कैसे दिया जा सकता है। निर्णायकों ने सभी को स्वर्ण पदक देकर समस्या का शानदार हल ढूंढ निकाला। सब के सब विजयी इसलिए हुए कि उस दिन दोस्ती का अनोखा दृश्य देख दर्शको की तालियां थमने का नाम नहीं ले रही थी। 

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