राजस्थान के इतिहास के प्रमुख स्रोत - Rajasthan History

आज के इस लेख में हम आपके साथ ''राजस्थान के इतिहास के प्रमुख स्रोत'' पढ़ने पर चर्चा करेंगे। यहाँ पर  हम आपको उन सभी Major Source के बारे में विस्तार से बताएँगे जो राजस्थान के इतिहास की जानकारी देते है। तो आइये बिना समय व्यर्थ किये सीधे मुद्दे पर आते है। 

राजस्थान के इतिहास के प्रमुख स्रोत 

Major sources in the history of Rajasthan 

1. घोसुण्डी शिलालेख 

यह शिलालेख नगरी चितोड़ के घोसुण्डी गाँव में स्थित है। इस शिलालेख में उत्कीर्ण भाषा संस्कृत तथा लिपि ब्राम्ही लिपि मानी गयी है। इस शिलालेख की मदद से हमे द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व के गजवंश के सर्वतात द्वारा अश्वमेघ यज्ञ करने तथा चारदीवारी बनाने का उल्लेख मिलता है। 

2. नाथ प्रशस्ति 

यह प्रशस्ति हर्षनाथ मंदिर सीकर में सन 973 की मानी जाती है इसमें हर्षनाथ मंदिर का निर्माण अल्लट द्वारा करवाए जाने का उल्लेख मिलता है। इसमें चौहानो के वंशक्रम का समावेश है। 

3. किराडू का लेख 

किराडू बाड़मेर में स्थित शिवमंदिर में संस्कृत भाषा में यह लेख सन 1161 इ में लिखा गया। जिसमे वहां की परमार शाखा का वंशक्रम दिया गया है। इसमें परमारो की उतपति ऋषि वरिष्ठ के आबू यज्ञ से बताई गयी है। 

4. बिजोलिया का शिलालेख 

इस शिलालेख के रचयिता गुणभद्र है। बिजोलिया के पास स्थित पाश्र्व नाथ मंदिर की एक चट्टान पर उत्कीर्ण है इसमें साम्भर व अजमेर के चौहानो को वत्स्गोत्रीय बताते हुए उनकी वंशावली दी गयी है। इस लेख में उस समय के प्राचीन क्षेत्रो के प्राचीन नामो का भी उल्लेख मिलता है। 

5. चिरवा का शिलालेख 

सन 1273 ईस्वी में चिरवा गांव उदयपुर में चिरवा का शिलालेख प्राप्त हुआ। इस शिलालेख की लिपि नागरी है तथा इसके लेखक रत्नप्रभासुरी है। इस शिलालेख से हमे मेवाड़ के बप्पारावल के वंशजो की कीर्ति का वर्णन मिलता है। 

6. कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति 

इसके प्रशस्तिकार महेश भट्ट जी है जिन्होंने राणा कुंभा के शासनकाल में कई शिलाओं सं 1460 में विजयस्तम्भ में उत्कीर्ण किया था। अब केवल इसकी दो ही शिलाये बची हुयी है इस प्रशस्ति में बप्पा से लेकर कुम्भा तक के शासको की वंशावली और उपलब्धियों का वर्णन है। 

7. कुम्भलगढ़ का शिलालेख 

इस शिलालेख के रचयिता कवी महेश है। यह कुम्भश्याम मंदिर में पांच शिलाओं पर उत्कीर्ण था जिसे अब मामदेव मंदिर कहते है इसके राजवर्णन में गुहिल वंश का उल्लेख है। 

8 राज प्रशस्ति 

इसके लेखक रणछोड़ भट्ट तेलंग है। सं 1676  ईस्वी में महाराजा राजसिंह द्वारा राजसमंद झील की नो पाल ताको को पर इसका निर्माण करवाया था इस प्रशस्ति से हमे महाराजा अमरसिंह द्वारा मुगलो से की गयी संधि के बारे में जानकारी मिलती है। 



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