आलेख : आवश्यक लेखन तत्व तथा उदाहरण

लेख से पूर्व ''आ'' उपसर्ग जोड़ने से आलेख शब्द बनता है। आलेख निबंध लेखन का ही एक लघु रूप है। 'आ' उपसर्ग लेख के सम्यक और सर्वांग-सम्पूर्ण होने को व्यंजित करता है। समाचार पत्रों में कुछ लेख प्रकाशित होते है जो किसी समाचार या घटनाक्रम आदि पर आधारित होते है। ये सम्पादकीय भिन्न होते है। इनको आलेख कहते है। आलेख साहित्य, खेलकूद, फिल्मजगत, व्यापार, विज्ञान, समाज तथा राजनीती इत्यादि विषयो से संबंधित होते है। आलेख में किसी विषय के संबंध में तथ्यात्मक तथा सम्पूर्ण सुचना दी जाती है। इसमें कल्पना के लिए कोई स्थान नहीं होता। इनकी शैली विचार-विश्लेषणात्मक होती है। इनमे तथ्यों, समाचारो और सूचनाओं पर ज्यादा जोर दिया जाता है। तो चलिए Aalekh के महत्वपूर्ण तत्वों पर फोकस करते है। 

aalekh-आलेख : आवश्यक लेखन तत्व तथा उदाहरण


आलेख के आवश्यक पांच तत्व 

1. आलेख किसी जव्लंत समस्या, तत्कालीन घटनाक्रम, महत्वपूर्ण व्यक्तियों तथा प्रसिद्ध विषयो के बारे में लिखे जाते है। 

2. आलेख विचारात्मक होते है। लेखक उसमे किसी विषय को विचार-विश्लेषणात्मक शैली में प्रस्तुत करता है। 

3. आलेख की भाषा वर्ण्य-विषय व्यंजित करने में असमर्थ एवं सरल होती है। 

4. आलेख में प्रस्तुत सामग्री प्रमाणिक, स्पष्ट और असंदिग्ध होती है।  

5. आलेख का आरम्भ तथा समापन रोचक तथा जिज्ञासापूर्ण होता है। 

आलेख लेखन का उदाहरण 

निशुल्क कन्या शिक्षा के परिणाम पर आलेख 

आलेख - भारतीय समाज में कन्याओ को सुशिक्षित बनाने के प्रति सदा से उदासीनता और शंका का वातावरण रहा है। आम लोगो की धारणा रही है कि कन्याओ को शिक्षित बनाने का कोई लाभ नहीं है। उन्हें तो अंततः  चूल्हे-चौके में खप जाना है। पर्दा प्रथा और दहेज भी कन्या शिक्षा में बाधक रहे है। आज परिस्तिथियाँ बदलने और सरकार के कन्या शिक्षा के प्रति उत्तरदायित्व को गंभीरता से लेने से परिदृश्य बदला है। कन्या शिक्षा को निशुल्क किये जाने से गरीब कन्याओ को भी शिक्षित होने का अवसर प्राप्त हुआ है। इसके सुपरिणाम भी सामने आ रहे है। लड़के और लड़कियाँ के शिक्षा अनुपात में संतुलन आ रहा है। निशुल्क शिक्षा ने लोगो को कन्याओ को शिक्षा दिलाने के लिए प्रोत्साहित किया है। फिर भी कुल मिलाकर परिणाम उत्साहजनक नहीं कहे जा सकते। पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश में कन्या शिक्षा में अनेक प्रोत्साहनदायक कदम उठाये गए। छात्राओं को निशुल्क साईकिल दिया जाना, उच्च शिक्षा को भी निशुल्क बनाना आदि ऐसी ही योजनएं है। केवल निःशुल्क शिक्षा ग्रामीण जनता को प्रेरित करने के लिए नहीं है। उनकी कन्याओ के प्रति मनोवृति को भी बदलना होगा। लड़के और लड़की के भेदभाव को मिटाया जाये तथा दहेज प्रथा पर भी कठोर नियंत्रण किया जाये तभी कन्याएँ निःशुल्क शिक्षा का पूरा लाभ उठा पायेगी। 

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