Hindi Story - खरगोश और हाथी की हिंदी स्टोरी

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Hindi Story - खरगोश और हाथी की हिंदी स्टोरी


Hindi Story - खरगोश और हाथी की हिंदी स्टोरी 

किसी बन में एक बहुत बड़ा तालाब था उसका नाम था चन्द्रसर। उनके किनारे पर खरगोशो का राजा शीलमुख रहता था। उसकी प्रजा भी वही तालाब के चारो ओर बस गई थी। 

उनके दिन बड़े सुख से बीत रहे थे। लेकिन एक साल बारिश बिलकुल भी नहीं हुई। चारो तरफ पानी का अकाल पड़ गया। बस इसी तालाब  कुछ पानी बचा था। 

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कुछ दूर पर हाथियों का राजा चतुर्दत भी रहता था। हाथियों को तो पानी खूब चाहिए। इसलिए जब और कही पानी ना मिला तो ढूंढते ढूंढते वे इस तालाब पर आ पहुंचे। 

यहाँ पर तो तालाब के चारो ओर किनारो पर खरगोश रहा करते थे। हाथियों के आने पर वे उनके पांवो के निचे कुचले गए और मर गए। 

यह देखकर उनका राजा शीलमुख बहुत उदास हुआ। उसने अपने सारे साथियो को इकट्ठा किया। 

राजा शीलमुख ने साथियो से कहा हाथियों को इस तालाब का पता लग गया है अब वो रोज यहाँ आएंगे और हम सब को मार डालेंगे। हमे कोई ऐसा उपाय करना चाहिए जिससे वे यहाँ न आ सके। 

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उन सभा में विजय नाम का एक खरगोश रहता था। वह बहुत ही सुंदर और चतुर था। मुसीबत के वक्त वही काम आता था। राजा ने उससे कहा विजय तुम हाथियों के राजा के पास जाओ। 

उन्हें ऐसी कोई बात बताओ जिससे वह सब हाथी यहाँ आने का विचार छोड़ दे। विजय तुम ही यह काम कर सकते हो। जब तुमने कोई काम करने का कोई बीड़ा उठाया है तो तुम उसमे  तुम बहुत चतुर हो अपने साथियो को कैसे भी करके बचाओ। 

अपनी इतनी प्रशंसा सुनकर विजय बहुत प्रसंन्न हुआ। और तुरंत हाथियों के राजा के पास चल पड़ा। जब हाथी उसे आते हुए दिखाई दिए तो वह एक पहाड़ी की चोटी पर चढ़ गया और बोला हे हाथियों के राजा में भगवान चन्द्रमा का दूत हूँ। 

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उन्होंने मुझे तुम्हारे पास भेजा है। और कहा है की यह चंद्रसर नाम का  तालाब मेरा है। में इसमें रहता हूँ ओर इसके चारो ओर रहने वाले खरगोश मेरे सेवक है। में इनका स्वामी हूँ तुमने मेरे बहुत से सेवको को मार डाला है और तालाब का पानी भी गन्दा कर दिया है। 

हाथियों का राजा यह सुनकर बहुत डर गया और बोला हे दूत क्या सचमुच चंद्रदेव मुझसे इतना नाराज है। 

खरगोश ने बहुत गंभीर स्वर में उत्तर दिया नाराज तो बहुत थे , पर हमारे प्रार्थना करने के कारण इस बार उन्होंने तुम्हे क्षमा कर दिया है। और कहा है कि यदि तुम कभी इस तालाब पर आओगे तुम्हे उसका दंड भोगना होगा। 

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यह सुनकर हाथी ने बड़े विनम्र भाव में कहा भगवान चन्द्रमा मेरे पूजनीय है में उनकी आज्ञा का पालन अवश्य करूंगा में फिर कभी उस तालाब में नहीं आऊंगा। 

विजय ने मन ही मन प्रसन्न होकर कहा आओ में तुम्हे चन्द्रमा के दर्शन करवाए देता हूँ तुम उनसे स्वयं क्षमा मांग लेना। 

यह कहकर विजय खरगोश हाथी को तालब पर ले गया और चन्द्रमा की पड़ती परछाई को दिखाकर कहा यह है महाराज चंद्रदेव। 

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हाथी ने दूर से उन्हें प्रणाम किया और क्षमा मांगी। उसके बाद वह कभी वहां नहीं आया। खरगोश पहले की भांति हंसी-ख़ुशी रहने लगे और विजय को अपना सबसे पसंदीदा मित्र बनाने लगे। इस तरह एक चतुर खरगोश विजय उनके सभी साथियो की जान बचाने में कामयाब हो पाया। 

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लेखक - Lokesh Reshwal 

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