कहानी छोटा जादूगर - बेस्ट मोरल स्टोरी इन हिंदी

नमस्कार प्रिय पाठको आज की इस पोस्ट में हम आपके नैतिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए एक ऐसी Kahani लेकर आये जो आपको प्रेरणा और नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाएगी। यह कहानी है छोटे जादूगर की जो खेल दिखाके अपनी माँ का इलाज करवाता है चलिए अब विस्तार से पढ़ते है इस Best Moral Story को In Hindi भाषा में। 


कहानी छोटा जादूगर - बेस्ट मोरल स्टोरी इन हिंदी kahani chote jadugar ki  best moral story in hindi

Best Moral Story In Hindi 



कार्निवल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी। हंसी और विनोद का कलनाद गूंज रहा था। में खड़ा था। उस छोटे फुहारे के पास, जहाँ एक लड़का चुपचाप शरबत पिने वालो को देख रहा था। उसके गले के ऊपर से फटे कुर्ते के ऊपर से एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी थी और जेब में कुछ ताश के पत्ते थे। उसके मुँह पर गंभीर विषाद के साथ धैर्य की रेखा थी। में न जाने उसकी और क्यों आकृष्ट हो रहा था। उसके अभाव में भी मुझे सम्पूर्णता दिखाई दे रही थी। 

मेने पूछा :- क्योंजी तमने इसमें क्या देखा ?

वो बोला मेने सब देखा है। यहाँ चूड़ी फेंकते है खिलोने पर निशाना लगाते है और तीर स नंबर भी छेदते है। मुझे खिलोनो पर निशाना लगाना अच्छा लग रहा था। मन में ही सोच रहा था जादूगर तो बड़ा निकम्मा है। लड़का कहा रहा है इससे अच्छा तो में ताश का खेल में ही दिखा सकता हूँ। उसने बड़े ही विश्वास के साथ यह बात कही उसकी वाणी में कही भी बनावट नहीं थी। 

मेने पूछा उस पर्दे में क्या है ?  क्या तुम वहां गए हो ?


Moral Story 

लड़का बोला "नहीं में वहां नहीं जा पाया" क्योकि वहां जाने का तो टिकट लगता है। तो मेने कहा तो चलो फिर में ले के चलता हूँ। मेने मन ही मन में सोच लिया की आज यही मेरा मित्र है। उसने कहा वहां जाकर हम क्या करेंगे। 
तो मेने कहा हम वहां जाकर निशाना लगाएंगे। 

मेने उससे सहमत होकर कहा कि चलो तो फिर हम पहले शरबत पिटे है और बाद में अंदर जायेंगे। वहां पर मनुष्यो की भीड़ लगी हुयी थी। हम दोनों ने पहले शरबत पिया और उसके बाद निशाना लगाने गए। 

राह में चलते चलते मेने उससे पूछा की तुम्हारे परिवार में कौन-कोन है!

उसने कहा माँ और बाबूजी !

मेने कहा क्या आपको यहाँ आने के लिए तुम्हारे बाबूजी ने मना नहीं किया ?

उसने गंभीर स्वर में कहा बाबूजी जेल में है !

मेने कहा 'क्यों'

उसने गर्व से कहा देश के लिए जेल गए है बाबूजी !

मेने कहा और तुम्हारी माँ ?

वह बोला माँ बीमार है ?

मेने कहा और तुम यहाँ तमाशा देख रहे हो ?

उसके मुँह पर तिरस्कार जैसी हंसी फुट पड़ी !

उसने कहा तमाशा देखने नहीं तमाशा दिखाने निकला हूँ ?


Moral Story Hindi 

कुछ पैसे ले जाऊंगा तमाशा दिखाके और माँ के लिए दवा खरीदूंगा ?
यदि आप मुझे शरबत ना पिलाकर आपने मेरा खेल देखकर मुझे कुछ दे दिया होता तो मुझे और अधिक प्रसंशा होती !

में आश्चर्य से उस तरह चौदह साल के लड़के को देखने लगा 

वो कह रहा था सर माँ बीमार है और पिताजी जेल में है तो मेने सोचा की तमाशा दिखकर क्कुह पैसे कमाकर माँ का इलाज भी करवा लूंगा और अपना पेट भी भर लूंगा। 

हम दोनों एक दूसरे की तरफ देखते हुए वहां पहुँच गए जहाँ खिलोनो को गेंद से गिराया जाता था। मेने बारह टिकट खरीदकर उस लड़के को दे दिया। 

वह लड़का निकला पक्का निशानेबाज ! एक भी गेंद खली नहीं गई ! देखने वाले सभी व्यक्ति दांग रह गए। उसने बारह खिलोनो को बटोर लिया लेकिन एक साथ उठा नहीं पाया ज्यादा खिलोने होने की वजह से।

लड़के ने कहा बाबूजी में आपको तमाशा दिखाऊंगा बाहर चलिए ! बाहर जाते ही लड़का भाग गया ना जाने कहा गायब हो गया !
मेने मन ही मन सोचा बेटा इतना जल्दी बदल गया !

में घूमता हुआ पान की दुकान पर आ पहुंचा। मेने वहां से पान खाया और इधर उधर टहलने लगा आस पास उस लड़के को देखने का प्रयास करने लगा ! अचानक मुझे किसी ने ऊपर हिंडोले से पुकारा बाबूजी !
मेने पूछा कौन ?
उसन कहा में हूँ छोटा जादूगर !


Kahani जादूगर की 

में झील के किनारे बैठकर जलपान करने लगा। मण्डली में बाते भी कर रहा था। इतने में ही मुझे छोटा जादूगर दिखाई पड़ा ! उसने हाथ में चारखाने का खादी का झोला ले रखा था मस्तानी चाल में झूमता हुआ मुझसे कहने लगा बाबूजी आप कहे तो तमाशा दिखा दू !

मेने कहा नहीं बच्चे अभी में जलपान कर रहा हूँ ! फिर उसने जिद करते हुए कहा गाना बजाना भी होगा ! फिर मेने गुस्से में कहा नहीं मुझे नहीं देखना। 

तभी श्री मति ने कहा "दिखलाओ जी तुम तो अच्छे आये भला कुछ मन तो बहले ! में चुप हो गया क्योकि श्री मति जी की वाणी में माँ की वाणी की मिठास थी। जिसके सामने लड़के को रोका नहीं जा सकता। 
लड़के ने खेल आरम्भ किया उस दिन कार्निवाल के सभी खिलोने उसके खेल में अभिनय करने लगे। भालू मनाने लगा। बिल्ली रूठने लगी। बन्दर घुड़कने लगा। गुड़िया का ब्याह हुआ। लड़के ने सब को हंसा हंसा के लोट पॉट कर दिया। 

म सोच रहा था बालक को आवश्यकता ने कितना चतुर बना दिया है। यही तो संसार है। खेल खत्म होने के बाद श्री मति ने धीरे से उसे एक रुपया दिया वह उछल पड़ा। मेने कहा ! लड़के !


Kahani In Hindi 


छोटा जादूगर कहिये यही मेरा नाम है इसी से मेरी जीविका है। 

लड़का कुछ कहना चाहता था पर उससे पहले ही श्री मति ने लड़के से कहा तुम इस एक रूपये का क्या करोगे ?

लड़का बोला पहले तो भर पेट पकोड़ी खाऊंगा उसके बाद एक सूती कम्बल खरीदूंगा। वह नमस्कार करके चला गया और हम भी निकल गए। 

हम लोग मोटर में बैठकर निकले ! अचानक मुझे एक झोपडी के पास वह छोटा जादूगर दिखाई दिया मेने मोटर रोककर पूछा तुम यहाँ कहा!

लड़के ने कहा माँ अब इसी झोपडी में है अस्पताल वालो ने उसे निकाल दिया अब। में मोटर से उतरकर उस झोपडी के अंदर गया और देखा एक स्त्री चित्तड़ो से लिपटी हुई काँप रही थी। लड़के की आँखों से आंसू निकल आये। 

में कुछ देर वहां रुका और वहां से बाद में निकल गया। 

रात के दस बजे हुए थे। लड़का खेल दिखा रहा था। खेल अच्छी तरह से दिकः रहा था पर मेने महसूस किया की लड़के की वाणी में प्रसंशा नहीं थी। वह जब औरो को हंसाने की चेष्टा कर रहा था तब स्वयं कांप रहा था। में सब आश्चर्य के साथ देख रहा था। खेल समाप्त होने के बाद लड़के ने पैसे बटोर कर बीड़ में मुझे देखा। वह मुझे देखते ही क्षण भर में ही स्पूर्ति दिखाने लगा। 

मैंने उसकी पीठ थपथपाते हुए कहा 
आज तुम्हारा खेल जमा क्यों नहीं ?


Moral Kahani 

उसने कहा माँ ने कहा है की आज जल्दी चले आना। मेरी अंतिम घड़ी समीप है। मेने कहा तब भी तुम खेल दिखाने चले आये। मेने क्रोध से कहा। उसके चेहरे पर दुःख की छाया जलक रही थी। अब में ज्यादा कुछ नहीं बोल पा रहा था उस लड़के को क्योकि उसके चेहरे पर दुःख प्रकट हो रहा था। 

जल्दी से लड़का और में मोटर से झोपडी में पहुंचे। जादूगर झोपडी में माँ-माँ कहते हुए दौड़ता हुआ गया। में उसके पीछे गया मेने देखा उस स्त्री के मुँह से सिर्फ बे निकलकर रह गया। जादूगर अपनी माँ से लिपटकर रोने लगा। बिना किसी दया के भी मेरी आँखों से आंसू गिरने लगे। 

मेने जैसे तैसे करके उस लड़के को उसके बाबूजी से मिलाया और वहां से हमेशा के लिए चला आया। उम्मीद है छोटा जादूगर दोबारा मिलेगा। 

Moral - यदि आपके पास कोई भी बच्चा आये और खाने के लिए कुछ मांगे तो उसे कुछ खिला दीजियेगा क्योकि उनके घर में हालात छोटे जादूगर जैसे हो सकते है। बच्चो को खाना खिलाना तो भगवान की सेवा करने जैसा है। 

प्रिय दर्शको कहानी को अपने फेसबुक फ्रेंड्स के साथ नीचे दिए गए शेयर बटन्स की सहायता से शेयर कर दीजिये ताकि यह Kahani हर एक युवा तक पहुँच सके। 






NEXT ARTICLE Next Post
PREVIOUS ARTICLE Previous Post
NEXT ARTICLE Next Post
PREVIOUS ARTICLE Previous Post