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8 Short Hindi Stories With Moral For Kids

बेस्टबुक Moral stories पढ़ने के लिए दर्शको द्वारा सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला माध्यम बन चूका है यदि आप यहाँ के नियमित पाठक है तो आपको पता होगा यहाँ पर विश्व की सर्वाधिक हिंदी कहानियां प्रकाशित हो चुकी है जिनमे से 8 Short Hindi Stories With Moral For Kids के लिए यहाँ पर सूचीबद्ध है। 



8 Short Hindi Stories With Moral For Kids



Moral Stories kahaniyan Hindi 


1 मेहनत की कमाई 

Short Moral Story For Kids In Hindi

 

एक अमीर बाप का बेटा आलसी और निर्लज्ज था। एक दिन उसके पिता ने उसे कुछ कमाकर लाने के लिए कहा। लड़का अपनी माँ के पास मिन्नते कर एक रूपये का सिक्का ले आया और अपने पिता को सौप दिया। पिताजी सब कुछ समझ गए। 

उसने बेटे को वह सिक्का कुएँ में डालने को कहा लड़के ने झट से सिक्के को कुएँ में फेंक दिया। अगले दिन पिता ने लड़के से फिर कमाकर लाने के लिए कहा। अबकी बार लड़के ने अपनी बहन से एक रुपया लाकर पिताजी को सौप दिया पिताजी ने उसे भी कुएँ में फिकवा दिया। अगले दिन पिता ने माँ और बेटी को घर से बाहर भेज दिया, और लड़के से कमाकर लाने की बात कही। बेटा दिनभर घर पर सुस्त बैठा रहा। 

अंत में शाम के समय वह कुछ काम ढूंढने के लिए बाजार गया। वहां पर एक सेठ ने अपना सामान घर पहुंचाने के बदले उसे एक चवन्नी दी। लड़का थक गया था उसके पुरे शरीर में दर्द हो रहा था। रात में घर आकर पिताजी को उसने चवन्नी सौप दी। 

पिता ने फिर उसे कुएँ में डालने की बात कही। इस पर लड़के को गुस्सा आ गया उसने कहा पिताजी यह मेरी मेहनत की कमाई है। अनुभवी पिता समझ गया था कि बेटे को मेहनत की कमाई का मतलब समझ आ गया था। अगले ही दिन पिता ने अपना सारा कारोबार बेटे को सौप दिया। उस दिन बेटा और पिताजी बहुत खुश थे। 



कहानी से सीख Moral Massage 

माँ-बाप हमेशा अपने बच्चो को सही शिक्षा देते है उनकी आज्ञा का पालन पूरी ईमानदारी से करना उनके लिए नहीं हमारे भविष्य के लिए फायदेमंद होता है इसलिए हमेशा अपने माता-पिता कहना मानना चाहिए। 

2. अनोखी सूझ 

Moral Stories In Hindi Short


पुराने जमाने में देवताओ और दानवो के बीच अपने को श्रेष्ठ साबित करने के लिए युद्ध होता रहता था। एक बार देवता और दानव मिलकर ब्रह्माजी के पास गए और पूछा की हममे से बुद्धि में कौन बड़ा है ? ब्रह्माजी ने दोनों  को भोजन पर बुलाया। 

देवता और दानवो को अलग-अलग कमरों में बैठाकर लड्डुओं के थाल भिजवा दिए और शर्त लगा दी कि बिना कोहनी मोड़े भोजन करना है। देवता आमने-सामने बैठ गए और लड्डू उठाकर एक-दूसरे के मुँह में देने लगे। इस प्रकार उन्होंने शांति पूर्वक भोजन कर लिया। 

वही दानवो ने लड्डू उछाल-उछाल कर खाना शुरू किया। कुछ लड्डू उनके मुँह में गए और कुछ कमरे में फेल गए। कमरे में शोर-शराबा और गन्दगी फेल गयी। भोजन के बाद ब्रह्माजी ने कहा कि देवताओ ने सहयोग की भावनाओ से काम किया जबकि दानवो ने न तो खुद खाया और न ही दुसरो को खाने दिया। इस प्रकार देवताओ को बुद्धि में श्रेष्ठ घोषित किया गया। 


कहानी से सीख 
Moral Education From This Story

कुछ कार्य ऐसे होते है जिन्हे करना आसान होता है परन्तु सही सूझ-बुझ ना होने से हम वो कार्य नहीं कर पाते है। ऐसे कार्य करने का मौका मिले तो सूझ-बुझ का प्रयोग करना चाहिए।  



3. खरगोश और कछुआ 


The Moral Stories In Hindi 

एक जंगल था जिसमे एक खरगोश और कछुआ रहता था। खरगोश अपनी दौड़ के ऊपर घमंड में रहता था। बेचारा कछुआ साधारण सोच वाला था परन्तु जिंदगी में खुश था। एक दिन खरगोश और कछुआ की मुलाकात हुयी। खरगोश ने कछुए से दौड़ लगाने की पेशकश की। 

कछुए ने खरगोश को दौड़ के लिए हामी भर दी। दोनों के मध्य शर्त लगी की जो भी सबसे पहले तालाब के पास पहुंचेगा वो विजेता होगा। इस प्रकार खरगोश तेजी से दौड़ने लगा वही कछुआ धीरे-धीरे दौड़ने लगा। 


खरगोश दौड़ता हुआ बहुत दूर तक चला गया और एक पेड़ के निचे बैठकर सोचने लगा की में कुछ समय के लिए आराम कर लेता हु कछुआ तो अभी बहुत पीछे है। इस प्रकार आराम करते हुए खरगोश की आँख लग गयी। कछुआ चलता हुआ तालाब के पास जा पंहुचा। 


कुछ समय बाद खरगोश की आँख खुली खरगोश तेज गति से दौड़ता हुआ तालाब के पास पंहुचा। वहां पर कछुए को देखकर खरगोश दुखी हो गया और हार गया। कछुआ इस जीत से बहुत खुश हुआ और वहां से जाते हुए खरगोश से बोला क्यों रे घमंडी इतना तेज दौड़ा फिर भी हार गया। घमंडी खरगोश नजरे चुराकर भाग गया।



कहानी से सीख Moral Siksha

हर आदमी के पास अपना-अपना हुनर होता है पर अपने हुनर पर जो भी घमंड करता हु उसका परिणाम घमंडी खरगोश जैसा होता है। इस कहानी से हमे सीख मिलती है की हमे अपने काम अधूरे नहीं रखने चाहिए पढाई करनी है तो पुरे साल कछुए की तरह धीरे-धीरे करो खरगोश की तरह तेज गति से मत पढ़ो तभी टॉपर बनोगे। 

4. कौआ और मंगर 

Moral Stories In Hindi For Class 7 

एक घना जंगल था उसमे एक कौआ रहता था। जंगल के अंदर ही एक तालाब था जिसमे एक मंगर रहता था। एक दिन कौआ तालाब के पास बैठकर फल खा रहा था तभी मंगर बाहर आया और बोला क्या तुम मुझे भी फल खाने के लिए दोगे तो कौए ने कहा हां भाई तुझे में फल खाने के लिए दूंगा परन्तु तुम्हे भी मुझे खाने के लिए मछली देनी होगी और मुझसे दोस्ती करनी पड़ेगी। इस प्रकार दोनों के मध्य दोस्ती हो गयी। 

रोजाना दोनों तालाब के किनारे बाते करते हुए फल और मछलियाँ खाते रहे। दोनों की दोस्ती मजबूत हो गयी। एक दिन मंगर की पत्नी ने मंगर से कहा की मुझे किसी का दिल खाना है तो मंगर ने कहा दिल कहा से लाउ तो पत्नी ने कहा आप जब तक मेरे लिए दिल नहीं लाओगे में तब तक कुछ नहीं खाउंगी। 

मंगर उदास हो गया और सोचने लगा में दिल कहा से लाऊ। दूसरे दिन वो अपने मित्र कोए से मिला और उसको भहला-फुसला कर कहने लगा कि भाई हमारी दोस्ती को कितने दिन हो गए परन्तु मेने तुझे अपना घर नहीं दिखाया। तो कौआ बोल मंगर तेरा घर तो पानी में है में वहां कैसे जाऊंगा। मंगर ने कहा मेरी पीठ पर बेठ जा में ले चलूँगा। 

कौआ मंगर की पीठ पर बैठ गया। तालाब के अंदर पहुंचने पर मंगर ने पत्नी की सारी बात कोए को बताई। कौआ सोचने लगा अरे यार इसकी पत्नी तो मुझे खा जाएगी अब में क्या करू। 

कोए ने मंगर से कहा अरे दोस्त तेरी पत्नी को तो दिल खाना है  मे तो दिल को पेड़ पर ही छोड़ आया। मंगर ने कहा चलो वापस चलते है दिल को लेकर आते है। 

इस प्रकार कौआ फिर से बाहर आ गया और उड़कर पेड़ पर बैठ गया। कोए ने मंगर को ठेंगा दिखाके कहा क्यों रे मुझे अपनी पत्नी का भोजन बनाना चाहता था। अरे मुर्ख मंगर दिल अंदर रहता है पेड़ पर नहीं आज से तेरी मेरी दोस्ती खत्म। यह कहकर कौआ उड़ गया। मंगर उदास होकर सोचने लगा मेरा दोस्त भी गया और मेरी पत्नी भी।

कहानी से सीख Kahani Se Moral Sikh 

दोस्ती करके दोस्ती में धोखा नहीं करना चाहिए वरना मंगर की तरह ना घर के रहोगे ना घाट के।    


5. दयावान सेठ और लालची राजू Moral Stories In Hindi For Kids 


एक छोटा सा गांव था उसमे एक राजू नाम का लालची बालक रहता था। राजू के माता-पिता बूढ़े हो गए थे। राजू के पास एक भैंस थी उसी से उनका घर चलता था। राजू रोजाना भैंस चराने जाता था। वो अपनी भैंस को हमेशा फसलों में चराता था उसकी भैंस फसलें खा-खा के मोटी-तगड़ी हो गयी थी।

गांव में एक सेठ भी रहता था उसके पास भी एक भैंस थी। उसने राजू की भैंस को देखकर सोचा की क्यों ना में इसे अपनी भैंस चराने के लिए महीने के हिसाब से बांध लू। सेठ ने राजू को बुलाकर कहा की राजू क्या तुम मेरी भैंस भी चरा सकते हूँ में तुम्हे महीने के हिसाब से पैसे दूंगा। 

राजू ने भैंस चराने के लिए हामी भर दी। अब राजू रोजाना सेठ की भैंस को भी चराने के लिए ले जाने लगा। परन्तु राजू अपनी भेस को तो फसलों में खुली छोड़ के चराता परन्तु सेठ की भैंस को नहीं। कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा फलस्वरूप सेठ जी की भैंस पतली और थकी हुयी लगने लगी। 

सेठ ने राजू से पूछा राजू मेरी भैंस इतनी कमजोर कैसे हो गयी तुम्हारी भैंस तो मोटी हो रही है। राजू ने कहा सेठ जी आपकी भैंस शायद चरती कम है। सेठ उसकी बात से असहमत था। सेठ ने सचाई पता लगाने की सोची। 

सेठ एक दिन राजू का पीछा करता हुआ गया वहां जाकर उसने सारी बात जान ली। सेठ गुस्से में जाकर बोला राजू तुम ऐसे चराते हो मेरी भैंस को। अब में तुम्हे कोई पैसा नहीं देने वाला। सेठ अपनी भैंस को लेकर घर आ गया। 


कहानी से सीख ( Moral Message )

लालच में इंसान अँधा हो जाता है लालची बनोगे तो परिणाम भुगतने पड़ सकते है तभी तो कहा गया लालच बुरी भला है। 


6. हंस और मछलियाँ 

Moral Of Stories In Hindi 


एक छोटा सा तालाब था उसमे कुछ मछलियाँ थी पास में ही एक पेड़ पर हंस भी रहता था। मछलियाँ और हंस के मध्य अच्छी दोस्ती थी। गर्मी के दिन थे तालाब धीरे धीरे सोख रहा था। मछलियाँ अपने जीवन को लेकर परेशान थी कि अब हमारा जीवन समाप्त होने वाला है। 

उस तालाब में एक बड़ा केकड़ा भी रहता था। सभी मछलियों की इस परेशानी का फायदा उठाने के लिए लालची हंस ने एक योजना बनाई और मछलियों के पास जाकर बोला देखो मछलियों यह तालाब सूखने वाला है पास में ही एक बड़ा तालाब है में तुम्हे वहां पर ले जाऊंगा अगर तुम सब चाहो तो। 

बेचारी मछलियां लालची हंस के जाल में फंस चुकी थी। हंस अपनी चोंच में एक लकड़ी का टुकड़ा पकड़ लेता और दो मछलियाँ उस टुकड़े को मुँह से पकड़ लेती। हंस उड़कर उन मछलियों को एक पत्थर पर ले जाकर खा जाता था। 

इस प्रकार वो रोजाना इस उपाय से मछलियों को खा रहा था। एक दिन केकड़े ने हंस से कहा आज मुझे ले चलो हंस तो हंस ने सोचा अरे यार रोजाना मछलियाँ खा-खा के बोर हो गया आज केकड़ा खाऊंगा। हंस ने केकड़े को लकड़ी पकड़ाकर उड़ गया। 

अब वो पत्थर पर उतरने वाला था परन्तु केकड़े ने मछलियों के कंकाल पत्थर पर देख लिए थे। केकड़े ने देर ना करते हुए हंस की गर्दन पर अपने नाखून गाड़ दिए और हंस को मार दिया। केकड़ा धीरे-धीरे रेंगते हुए तालाब में पहुंचा और हंस की सारी चाल मछलियों को बताई। मछलियाँ यह सुनकर बहुत उदास हुयी। 



कहानी से सीख Kahani Se Massage

दुसरो को अपने जाल में फंसाने से पहले अपने बारे में सोचना जरुरी है वरना हंस की तरह बेमौत मारे जाओगे। 

7. जीनु और चार चोर ( Moral Stories In Hindi For Class 2

एक छोटा सा कस्बा था उसमे जीनु नाम का एक होशियार बालक रहता था। जीनु के माता-पिता गरीब थे। एक रात जीनु अपने खेत पर जा रहा था। परन्तु रास्ते से कुछ आवाजे उसे सुनाई दी तो वो झट से बरगद के पेड़ पर चढ़ गया। 

तभी उसने देखा की चार चोर चोरी का माल लेकर बरगद की और आ रहे थे। चारो चोर बरगद के निचे आकर बेठ गए और चोरी के माल को चार हिस्सों में बांटने की बात करने लगे। तभी 

पहला चोर : अरे यार मेने सुना है इस बरगद के पास भूत रहते है। 
दूसरा चोर : हां यार तू सच कह रहा मेरी माँ ने मुझे यहाँ के बारे बताया था। 
तीसरा चोर : तो फिर जल्दी-जल्दी बाँटते है। 

चौथा चोर : हां जल्दी करो कही भूत आ गया तो में तो भाग जाऊंगा। 
इन बातो को सुनकर जीनु को एक तरकीब सूझी उसने बरगद से एक पुरानी मोती लकड़ी तोड़ी और उसका बरगद से निचे गिराने के लिए छोड़ दिया। वो लकड़ी बड़-बड़ करती हुयी निचे आने लगी। 

लकड़ी की आवाज को सुनकर चार चोर वहां से फरार हो गए और चोरी का माल वही पर छोड़ गए। जीनु बरगद से उतरकर सोना-चांदी को लेकर घर आ गया। इस प्रकार उसके घर वाले हमेशा के लिए खुश हो गए और कहने लगे वाह रे बेटे जीनु तूने तो कमाल कर दिया। 

कहानी से सीख Moral Kahani Se Sikh  

यह कहानी हमे सन्देश देती है की ऐसा मौका अगर जिंदगी में मिले तो उससे चूको मत। अन्धविश्वाश की दुनिया से डरो मत यह सब मन की भावनाये और कुछ नहीं। 

8. किसान और दो बेटे 

Moral Stories In Hindi For Class 9 

एक गांव था उसमे एक किसान रहता था किसान के दो बेटे थे पहले का नाम रामु और दूसरे का नाम श्यामू था। किसान अब बूढ़ा हो गया था। किसान कुछ दिनों से लगातार बीमार रहने लगा था। दोनों बेटे किसान की सेवा में लगे रहे। 

किसान को लगने लगा की शायद अब में मरने वाला हु तो उसने दोनों बेटो को अकेले में मिलने के लिए कहा। दोनों बेटे किसान के पास गए किसान ने दोनों बेटो को कहा मेरे मरने के बाद अपने खेत के किनारे पर मेने दो मटके गाड़ रखे है उन दोनों में से एक-एक ले लेना और लड़ना झगड़ना मत। एक-दो दिन बाद ही किसान की मृत्यु हो गयी। 

किसान के बारह दिन निकलने के बाद दोनों भाई गांव के पंचो सहित खेत के किनारे चले गए। खेत के किनारे पर खुदाई करने से उन्हें दो मटके मिले। दोनों ने एक-एक मटका ले लिया। रामु के मटके में सोना-चांदी था जबकि श्यामू के मटके में मिटटी। रामु और श्यामू पंचो सहित राजा के दरबार में पहुंच गए। उन्होंने राजा को सारी बात बताई। 

राजा ने हँसते हुए कहा की श्यामू तुम्हारे मटके में मिटटी इस बात की और संकेत करती है की तुम्हे अपने पिता की सारी जमीन मिलेगी। 
दोनों भाई खुशी-खुशी घर आ गए। 


कहानी से सीख Netik Siksha

दोस्तों हमे इस कहानी से सीख मिलतीं है की हमे हमेशा मिल जुलकर किये गए फैसले का समान करना चाहिए। हमेशा परिवार को सयुंक्त बनाये रखने के प्रयास करने चाहिए। जिंदगी सिर्फ एक बार मिली है रिश्तो भी एक बार ही मिले है उन्हें अपनाना और निभाना आपका दायित्व है।  


हिंदी कहानियों का संग्रह मैने इस पोस्ट में आपके लिए शेयर किया है जिनमे पूरी 8 moral stories in Hindi मे है कहानियों के साथ साथ moral massage भी आपको नेतीक शिक्षा के रूप में ग्रहण करने है।


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